Tuesday, July 19, 2016

चण्डीगढ़ : हरियाणा में सरस्वती नदी के पुनरुद्वार के लिए नदी की आंतरिक सफाई व खुदाई का कार्य जोर-शोर से


चण्डीगढ़ :  हरियाणा में सरस्वती नदी के पुनरुद्वार के लिए प्रदेश के यमुनानगर, कुरूक्षेत्र व कैथल जिले में नदी की आंतरिक सफाई व खुदाई का कार्य काफी जोर-शोर से चलाया जा रहा है जिसके लिए इस कार्य को सम्पन्न करवाने के लिए 30 जुलाई तक का लक्ष्य रखा गया है और 30 जुलाई को दादूपुर फीडर से ऊंचा चंदाना और ऊंचा चंदाना से सरस्वती में पानी छोड़ा जाएगा। इसके अलावा, सरस्वती पर्यटन वृत्त पर एक कांसेप्ट नोट तैयार किया जा रहा ताकि यह धरोहर विश्व के लिए एक आकर्षक केंद्र बिंदु भी बन सकें। 
यह जानकारी आज पंचकूला में हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की बैठक में दी गई, जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन प्रशान्त भारद्वाज ने की। बैठक में सरस्वती परियोजना के सभी पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि यमुनानगर जिले में 6 बोरवेल ओएनजीसी और 2 बोरवेल वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून, आदिबद्री और मुगलवाली में करने जा रही है जिसके लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
बैठक में बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री विजयेंद्र कुमार ने कहा कि बोर्ड के उद्देश्य  का मुख्य बिंदु सरस्वती नदी को धरा पर बहाना है। हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र  (हरसक ) हिसार इसके पेलियोचैनल का मैप तैयार कर रहा है, इससे  बोरवैल कहां करना है उसका सही चयन हो सकेगा। बैठक में सरस्वती पर हो रहे सभी वैज्ञानिक शोधों पर भी चर्चा हुई जिसके लिए बोर्ड सभी प्रकार के शोध ग्रंथों एवं रिपोर्ट को एकत्र कर रही है जिसे बाद में बोर्ड की वेबसाइट पर डाला जाएगा ताकी विश्व के लोग भी इसकी वैज्ञानिकता से परिचित हो। 
बोर्ड की बैठक में भाग लेते हुए इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसपी बंसल ने कहा कि सरस्वती धरोहर को पर्यटन के साथ जोडऩे की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वह सरस्वती पर्यटन वृत्त पर एक कांसेप्ट नोट तैयार कर रहे हैं, जिससे यह धरोहर विश्व के लिए एक आकर्षक केंद्र बिंदु बने। बैठक में सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त प्रधान सचिव श्री रविंद्र नाथ पराशर ने बताया कि इस बात को भी समझना आवश्यक है कि हम वैदिक सरस्वती की बात कर रहे हैं या पौराणिक सरस्वती की उन्होंने दोनो भेदों  के बारे में बताया और किस प्रकार हमारी सभ्यता विश्व की सभ्यता से भिन्न है, जो आज की युवा पीढ़ी को बताने की आवश्यकता है। हमें अपनी पुरातन सरस्वती धरोहर पर क्यों गर्व करना चाहिए यह विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाना चाहिए। भारत भूषण भारती, उपाध्यक्ष सरस्वती नदी शोध संस्थान ने नदियों को जोडक़र सरस्वती को बहाने पर बल दिया । 
बैठक में सरस्वती के वैज्ञानिक पक्षो की जानकारी देते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ए आर चौधरी ने कहा और कलायत,  भोरसैदां, मुगलवाली के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि यहां से एक विशाल नदी बहती थी और वर्तमान में भी उसके पेलियो चैनल मौजूद है । बैठक में करनाल के उपायुक्त मंदीप बराड़ ने भी सुझाव देते हुए कहा कि किस प्रकार हम एक नोडल एजेंसी बनाकर चार पांच स्थानों को विश्वस्तरीय सरस्वती तीर्थ बनाकर विश्व के समक्ष एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं । 
 वैपकोस के विशेषज्ञ हरमेल सिंह ने अपना सुझाव देते हुए बताया कि यमुनानगर में सॉन्ब सरस्वती लिंक स्थापित कर दो डेमो एवं एक सरस्वती सरोवर और पिहोवा के पास स्योंसर वन क्षेत्र में भी सरस्वती सरोवर बनाने की योजना तैयार की जा रही है , जिसमें आदि बद्री डैम और सरस्वती सरोवर बनाने की संभावित रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जो पुष्टि करती है कि इसके बनने से यमुनानगर जिले में बाढ़ नियंत्रण में आसानी होगी और बहने वाला वर्षा का रुकने से भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह जल भूजल को ऊपर ले कर आएगा जो कि एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी । 
बैठक का अध्यक्षीय संबोधन देते हुए डिप्टी चेयरमैन प्रशान्त भारद्वाज ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य सरस्वती नदी से जुड़े विशेषज्ञों से सुझाव लेना था कि किस प्रकार से सरस्वती की पुनरोद्धार परियोजना फलीभूत हो । बोर्ड के मूल उद्देश्य के साथ-साथ सरस्वती धरोहर की जानकारी सब जन तक पहुंचे और समाज की इस में भागीदारी भी सतत रहे इसके लिए एक जागरण अभियान एवं विश्वविद्यालयों में सरस्वती पीठ की स्थापना,  आदि बद्री सरस्वती नगर, कुरुक्षेत्र, ज्योतिसर, पिहोवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्रबिंदु बनाना भी  परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।  आने वाले दिनों में सरस्वती पर द्व4द्दश1.द्बठ्ठ पर एक निबंध प्रतियोगिता करवाई जाएगी। 
बैठक में कुरुक्षेत्र विजन के सदस्य मदन मोहन छाबड़ा, उपेंद्र सिंह सरस्वती नदी शोध संस्थान के सदस्य अरुण सर्राफ, श्याम बंसल, विनीत जैन, राजेंद्र राणा एवं सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता राजीव बंसल एवं जगमोहन सिंह, कला अधिकारी रेणु हुड्डा उपस्थित थे।

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